Dr. Bhimrao Ambedkar (hindi)


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(as of May 07,2021 00:32:08 UTC – Details)


विषय-सूची

1. बचपन और शिक्षा — 7

2. पहली नौकरी और अमेरिका के लिए प्रस्थान — 13

3. भारत वापसी — 17

4. लंदन रवानगी — 22

5. समानता का संघर्ष — 24

6. कई संघर्ष — 29

7. साइमन कमीशन और गोलमेज सम्मेलन — 32

8. महात्मा गांधी का प्रभाव — 36

9. डॉ. अंबेडकर में परिवर्तन — 43

10. वर्ष 1935 में भारत सरकार के लिए प्रस्तावित चुनाव — 49

11. युद्ध के वर्ष — 52

12. स्वतंत्रता और नया संविधान — 58

13. बौद्ध धर्म में परिवर्तन — 61

14. अंत — 64

15. डॉ. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म ही क्यों अपनाया? — 68

16. भारत में दलित राजनीति (डॉ. अंबेडकर के बाद) — 73


From the Publisher

Dr. Bhimrao Ambedkar by PANKAJ KISHOR (Author)

Dr. Bhimrao Ambedkar by PANKAJ KISHOR (Author)Dr. Bhimrao Ambedkar by PANKAJ KISHOR (Author)

सामाजिक समता-समरसता ही नहीं; राष्ट्रीय एकता की भी अपूरणीय क्षति हो रही है।

भीमराव रामजी आंबेडकर केवल भारतीय संविधान के निर्माता एवं करोड़ों शोषित-पीडि़त भारतीयों के मसीहा ही नहीं थे; वे अग्रणी समाज-सुधारक; श्रेष्ठ विचारक; तत्त्वचिंतक; अर्थशास्त्री; शिक्षाशास्त्री; पत्रकार; धर्म के ज्ञाता; कानून एवं नीति निर्माता और महान् राष्ट्रभक्त थे। उन्होंने समाज और राष्ट्रजीवन के हर पहलू पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। सामाजिक समता और बंधुता के आधार पर एक नूतन भारत के निर्माण की नींव रखी। उनका व्यक्तित्व एक विराट् सागर और कृतित्व उत्तुंग हिमालय जैसा था।विगत अनेक वर्षों से वैचारिक अस्पृश्यता और राजनीतिक स्वार्थ के लगातार बढ़ते जा रहे विस्तार ने हमारे जिन राष्ट्रनायकों के बारे में अनेक भ्रांतियुक्त धारणाओं को जनमानस में मजबूत करने का दूषित प्रयत्न किया है; उनमें डॉ. बाबासाहब आंबेडकर प्रमुख हैं। डॉ. बाबासाहब भीमराव आंबेडकर को समग्रता में प्रस्तुत करने वाला एक ऐसा अनन्य दस्तावेज है; जो उनके बारे में फैले या फैलाए गए सारे भ्रमों का निवारण करने में तो समर्थ है ही; साथ ही उन्हें एक चरम कोटि के दृष्टापुरुष तथा राष्ट्रनायक के रूप में प्रस्थापित करने में भी पूर्णतः सक्षम है।

विषय-सूची

1. बचपन और शिक्षा

2. पहली नौकरी और अमेरिका के लिए प्रस्थान

3. भारत वापसी

4. लंदन रवानगी

5. समानता का संघर्ष

6. कई संघर्ष

7. साइमन कमीशन और गोलमेज सम्मेलन

8. महात्मा गांधी का प्रभाव

9. डॉ. अंबेडकर में परिवर्तन

10. वर्ष 1935 में भारत सरकार के लिए प्रस्तावित चुनाव

11. युद्ध के वर्ष

12. स्वतंत्रता और नया संविधान

13. बौद्ध धर्म में परिवर्तन

14. अंत

15. डॉ. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म ही क्यों अपनाया?

16. भारत में दलित राजनीति (डॉ. अंबेडकर के बाद)

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भीमराव रामजी आंबेडकर केवल भारतीय संविधान के निर्माता एवं करोड़ों शोषित-पीडि़त भारतीयों के मसीहा ही नहीं थे; वे अग्रणी समाज-सुधारक; श्रेष्ठ विचारक; तत्त्वचिंतक; अर्थशास्त्री; शिक्षाशास्त्री; पत्रकार; धर्म के ज्ञाता; कानून एवं नीति निर्माता और महान् राष्ट्रभक्त थे। उन्होंने समाज और राष्ट्रजीवन के हर पहलू पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। सामाजिक समता और बंधुता के आधार पर एक नूतन भारत के निर्माण की नींव रखी। उनका व्यक्तित्व एक विराट् सागर और कृतित्व उत्तुंग हिमालय जैसा था।

DR. AMBEDKAR : JEEVAN DARSHAN

विगत अनेक वर्षों से वैचारिक अस्पृश्यता और राजनीतिक स्वार्थ के लगातार बढ़ते जा रहे विस्तार ने हमारे जिन राष्ट्रनायकों के बारे में अनेक भ्रांतियुक्त धारणाओं को जनमानस में मजबूत करने का दूषित प्रयत्न किया है; उनमें डॉ. बाबासाहब आंबेडकर प्रमुख हैं। उन्हें किसी जाति या वर्ग विशेष अथवा दल विशेष तक सीमित कर दिए जाने के कारण सामाजिक समता-समरसता ही नहीं; राष्ट्रीय एकता की भी अपूरणीय क्षति हो रही है। इस दृष्टि से चार खंडों में उनका व्यक्तित्व-कृतित्व वर्णित है

Dr. Ambedkar : Vyakti Darshan

उन्हें किसी जाति या वर्ग विशेष अथवा दल विशेष तक सीमित कर दिए जाने के कारण सामाजिक मा-समरसता ही नहीं, राष्ट्रीय एकता की भी अपूरणीय क्षति हो रही है। इस दृष्टि से चार खंडों में उनका व्यक्तित्व-कृतित्व वर्णित है: खंड एक—‘जीवन दर्शन’, खंड दो—‘व्यक्ति दर्शन’, खंड तीन— ‘आयाम दर्शन’ और खंड चार ‘राष्ट्र दर्शन’। डॉ. बाबासाहब भीमराव आंबेडकर को समग्रता में प्रस्तुत करने वाला एक ऐसा अनन्य दस्तावेज है, जो उनके बारे में फैले या फैलाए गए सारे भ्रमों का निवारण करने में तो समर्थ है ही, साथ ही उन्हें एक चरम कोटि के दृष्टापुरुष तथा राष्ट्रनायक के रूप में प्रस्थापित करने में भी पूर्णतः सक्षम है|

Dr. Ambedkar : Rashtra Darshan

उन्होंने समाज और राष्ट्रजीवन के हर पहलू पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। सामाजिक समता और बंधुता के आधार पर एक नूतन भारत के निर्माण की नींव रखी। उनका व्यक्तित्व एक विराट् सागर और कृतित्व उत्तुंग हिमालय जैसा था। विगत अनेक वर्षों से वैचारिक अस्पृश्यता और राजनीतिक स्वार्थ के लगातार बढ़ते जा रहे विस्तार ने हमारे जिन राष्ट्रनायकों के बारे में अनेक भ्रांतियुक्त धारणाओं को जनमानस में मजबूत करने का दूषित प्रयत्न किया है; उनमें डॉ. बाबासाहब आंबेडकर प्रमुख हैं। उन्हें किसी जाति या वर्ग विशेष अथवा दल विशेष तक सीमित कर दिए जाने के कारण सामाजिक समता-समरसता ही नहीं; राष्ट्रीय एकता की भी अपूरणीय क्षति हो रही है। इस दृष्टि से चार खंडों में उनका व्यक्तित्व-कृतित्व वर्णित है

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